राष्ट्रीय खेल दिवस: किसान का बेटा संवार रहा खिलाड़ियों का भविष्य, हौसले की कहानी है दिलचस्प


खिलाड़ी से कोच तक का सफर तय करने वाले किसान के बेटे संतोष का सपना भी बड़ा है. वो कुश्ती, कबड्डी और हैंडबॉल के ट्रेनर हैं. संतोष ने कई राष्ट्रीय प्रतियोगितओं में बतौर रेफरी, कोच और प्रबंधक के रूप में टीम का नेतृत्व किया है.


नवादा : आज देशभर में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है. ऐसे में उन खिलाड़ियों के बारे में जिक्र करना बेहद जरूरी हो जाता है, जो अपनी मेहनत से लगातार खेल की दुनिया को संवारते नजर आते हैं. बिहार के नवादा जिले में ऐसे ही एक कोच हैं, जिन्होंने खिलाड़ी से लेकर कोच तक का सफर तय किया और आज भी खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं

जिले के नरहट प्रखंड के चांदनी चौक का रहने वाले किसान मुकेश कुमार वर्मा के पुत्र संतोष कुमार वर्मा आज तमाम खिलाड़ियों को कोचिंग देते हैं. किसान का बेटा होने के साथ-साथ संतोष ने अपने जिले और राज्य का मान अपने खेल के जरिए बढ़ाया और खिलाड़ी से लेकर कोच तक का सफर तय किया.

शिष्य रच रहे कीर्तिमान
बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पले-बढ़े संतोष ने इसका प्रभाव अपने खेल पर नहीं होने दिया. लिहाजा, संतोष कुश्ती, कबड्डी और हैंडबॉल तीनों फॉर्मेट में राष्ट्रीय खेलों में जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. संतोष के दिए प्राथमिक प्रशिक्षण से उनके दर्जनों शिष्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल प्राप्त कर रहे हैं.

किराए के मकान में रहे संतोष

संतोष कुमार वर्मा के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. बावजूद इसके, पिताजी ने उन्हें पढ़ाई के लिए नवादा भेजा. यहां उन्होंने किराए के मकान में रहकर पढ़ाई के साथ-साथ अपने खेल को भी जारी रखा. अभी भी संतोष को शैक्षणिक कार्य और खेल से फुर्सत मिलते ही अपने किसान पिता के कामों में हाथ बंटाते हैं.

जीती हैं कुश्ती प्रतियोगिता

संतोष कहते हैं कि जब वो स्कूल में पढ़ रहे थे, तब सरकार की ओर से खेल प्रतियोगिता आयोजित हुई. इस प्रतियोगिता में वो चैंपियन रहे. उसके बाद जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में प्रथम स्थान लाए. वहां से उन्हें राज्यस्तरीय प्रतियोगिता के लिए भेजा गया. मोतिहारी में संतोष ने कुश्ती में बिना किसी प्रशिक्षण और कोच के मेडल हासिल किया. वहां से वापस लौटने पर नवादा जिला प्रशासन ने उन्हें सम्मानित किया. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वो खेल में ही अपना करियर बनाएंगे.

राष्ट्रीय स्तर पर मिला मौका
संतोष बताते हैं कि उन्हें पहली बार 2001 में उड़ीसा के भुवनेश्वर में राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला. यहां उन्हें देशभर में 6वां स्थान मिला. उसके बाद से यह खेल यात्रा अनवरत जारी है. इससे पहले संतोष के नेतृत्व में जिला बालक हैंडबॉल टीम लगातार 7 वर्षों से राज्य चैंपियन रही.

2017 में बने कोच
कोच संतोष ने बताया कि गुजरात के गांधीनगर में आयोजित 'खेलो इंडिया' राष्ट्रीय प्रतियोगिता प्रतियोगिता-2017 में बिहार बालक और बालिका टीम के कोच और प्रबंधक के रूप में उन्होंने पहली बार नेतृत्व किया. इस प्रतियोगिता में टीम ने देशभर में तीसरा लाकर कांस्य पदक हासिल कियाय. संतोष अब तक 24 राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बतौर कोच, रेफरी और प्रबंधक के रूप में हिस्सा ले चुके हैं.

खुश हैं संतोष के परिजन

संतोष की कामयाबी से पूरा जिला खुश है. वहीं, संतोष के दादा जी लखन प्रसाद की खुशी तो देखते ही बनती है. वो कहते हैं कि जब संतोष प्रतियोगिता जीतकर आते हैं और फोटो अखबार में देखते हैं, तो मन बहुत प्रसन्न होता है. पिता मुकेश कुमार वर्मा कहते हैं हमें खुशी है कि, हमारा बेटा कुछ अच्छा कर रहा है.

संतोष के दोस्त संजीत अपने बचपन और स्कूल के वक्त की बातें बताते हुए कहते हैं कि संतोष को शुरू से ही खेल में रुचि अधिक थी. पढ़ाई-लिखाई में भी ठीक था लेकिन ज्यादातर इसका ध्यान खेल में ही लगा रहता था. चाहे हैंडबॉल, कबड्डी, फुटबॉल ही क्यों न हो. आज इस मुकाम पर पहुंच गया है नवादा ही नहीं, राज्य का नाम रोशन कर रहा है.

'संतोष सर बहुत अच्छे कोच'
संतोष से प्रशिक्षण ले रही राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी सपना कुमारी का कहना है कि संतोष सर हमें कोच के रुप में प्रशिक्षण देते हैं, नेतृत्व करते हैं और सिखाते हैं. हमारी जीत में उनका योगदान अतुलनीय है. उन्होंने हमें प्रशिक्षण देकर इस काबिल बनाया है और मार्गदर्शन दिया है.

संतोष का सपना

संतोष कहते हैं कि उनके दिए गये प्रशिक्षण से जब खिलाड़ी जीतता है, तो बेहद खुशी होती है. उनका सपना है कि उनके शिष्य एशियाई खेल और ओलंपिक खेलों में जीत कर मेडल लाएं. इन खेलों में जिला ही नहीं, राज्य और देश का मान बढ़ाएं. विश्वभर में अपनी पहचान बनाएं.